लावारिश
ALOK CHANDAN·WEDNESDAY, FEBRUARY 10, 2016
आज शाम में एक दुर्घटना को देखा जो एक 60 साल के उम्र के बुजुर्ग के साथ हुआ,जब तक कुछ समझता मै वो काल के गाल में शमा गया था,
आज शाम में एक दुर्घटना को देखा जो एक 60 साल के उम्र के बुजुर्ग के साथ हुआ,जब तक कुछ समझता मै वो काल के गाल में शमा गया था,
खैर
मुझे क्या मै भी ओर्रो की तरह अपने काम मे निकल गया पर मैने सोचा एक बार देख तो लू|इस 4 करोड़
आबादी वाले मतलबी शहर में एक लावारिश लाश का क्या होता है|जब
पास गया और देखा एक पुलिस वाले ने उसको रिक्शे पर उठवा के दो लोगो को कहा वही
लेजाकर भैक दे| मैने उनसे पूछा ये कौन थे उसने कहा लावारिश और चल दिया|पर वो
था हमारे जैसा चलता फिरता इन्सान जिसका पता भी था और वारिश भी|
वो
जोनपुर (उ.प्र) से 14 जनवरी को डेल्ही आया था| जिसे
उसके ही बेटे नै घर से निकल दिया और वो अपने पेट की खातिर महानगर आ पंहुचा,
जहा
आते ही उसे भीख मागने को मजबूर होना था, पर वो
मेहनती था|
उसने
लोगो से काम माँगा और किसी ने उसे 1000 विजिटिंग
कार्ड बाटने को दे दिया बदले मे खाना देगा का वादा किया मैने
तब उसे देखा था की क्या है जिन्दगी| विसिटिंग
कार्ड भी लोग लेना नही चाह रहे थे|
किसी
नै हाथ हटा लिया किसी ने गाली दे दिया और फिर भी वो बाटता रहा क्यूंकि सवाल
था भूख का; जो कुछ नही समझता है सिवाए भोजन के। क्यूंकि
7
करोड़ आबादी दुनिया की आज भी भुखी रहती है (DATA BY
WHO) जिसको खाना नही मिलता उसमे ये भी था, मेरे
आँखों के सामने और उसे मै रोज देखता था| इस
ठण्ड मे वो METRO के निचे रोज सोता और
सुबह किसी से कार्ड ले कर और अपनी बहुमूल्य बैग जिसमे उसके कम्बल और चादर था
आलोक चन्दन
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